INDIA - CHINA War - Why is China disputing the border (LAC) with India?

Updated: Jul 15


INDIA - CHINA War - Why is China disputing the border (LAC) with India?

After the clash between Indo-China troops on the night of June 15 in the Galvan valley of Ladakh, the situation has not returned to normal. What is the situation in Galvan Valley now? What are the preparations? How and why did the dispute happen? Could India - China be War? What is defense news coming from India? All these issues will be discussed one by one.


लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून की रात को भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद अब तक हालात सामान्य नहीं हुए हैं। गालवन घाटी में अब क्या स्थिति है ? किसकी क्या तैयारियां हैं ? विवाद कैसे और क्यों हुआ? क्या india - china war हो सकता है ? भारत की तरफ से Defence News क्या आ रही है? इन सभी मुद्दों एक - एक करके बात की जाएगी।


The border dispute between India and China is old, starting from the 1950 . The Communist government of China at that time attacked India in 1962 with the aim of seizing India's land. China was also successful in this, it captured Tibet. After that, he fought with India and took possession of his land of 30,000 square kilometers, which is still intact. India was not defeated in 1962 because of the Indian Army in the India - China war, the reason for India's defeat was due to the wrong policies of the Central Government at that time.


भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पुराना है , इसकी शुरुआत 1950 के समय से सुरु हो गयी थी। उस समय की चीन की कम्युनिस्ट सरकार भारत की जमीन पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से सन 1962 को भारत पर हमला किया। इसमे चीन सफल भी हुआ , उसने तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया । उसके बाद इंडिया से युद्ध करके उसकी 30,000 वर्ग के किलोमीटर की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया जो आजतक कायम है। 1962 मे India china war मे भारत की सेना की वजह से भारत की हार नही हुई थी , भारत की हार का कारण उस समय की केंद्र की सरकार की गलत नीतियों की वजह से हुई थी।


1967 war : - India defeated china





The second India - china war took place in 1967, in which China was badly defeated. This battle took place in the strategically located Nathu La Pass where hundreds of Chinese soldiers were not only killed by our heroic soldiers in retaliation to Chinese audacity, but also demolished many of their bunkers, giving China the strength of Indian Militry power Got it.


दूसरा bharat china war 1967 को हुआ जिसमे चीन की बुरी तरह हार हुई थी। ये लड़ाई रणनीतिक स्थिति वाले नाथु ला दर्रे में हुई जहाँ हमारे वीर सैनिकों ने चीनी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सैकड़ों चीनी सैनिकों को न सिर्फ मार गिराया था, बल्कि उनके कई बंकरों को ध्वस्त कर दिया था , चीन को Indian Militry power का ताकत का अंदाज़ा हो गया


Nathu La Pass, located at 14,200 feet, is on the Tibet-Sikkim border, through which the old Gangtok-Yatung-Lhasa trade route passes. While the Sikkim-Tibet border has been clearly set, China has never considered Sikkim as a part of India. During the Indo-Pak war of 1965, China asked India to vacate Nathu La and Jelep La Pass. India's 17 Mountain Division evacuated Jelep La, but India's dominance over Nathu La continued. Even today Jelep La is in the possession of China.


Nathu La pass


14,200 फीट पर स्थित नाथु ला दर्रा तिब्बत-सिक्किम सीमा पर है, जिससे होकर पुराना गैंगटोक-यातुंग-ल्हासा व्यापार मार्ग गुजरता है. यूं तो सिक्किम-तिब्बत सीमा निर्धारण स्पष्ट ढंग से किया जा चुका है, पर चीन ने कभी भी सिक्किम को भारत का हिस्सा नहीं माना. 1965 के भारत-पाक युद्घ के दौरान चीन ने भारत को नाथु ला एवं जेलेप ला दर्रे खाली करने को कहा. भारत के 17 माउंटेन डिविजन ने जेलेप ला को तो खाली कर दिया, लेकिन नाथु ला पर भारत का आधिपत्य जारी रहा. आज भी जेलेप ला चीन के कब्जे में है।


Nathu La became the point of confrontation between the two countries. During the 1967 confrontation, Nathu La was responsible for India's 2nd Grenadiers Battalion. This battalion was commanded by the then Colonel (later Brigadier) Rai Singh. This battalion was commanded by a mountain brigade commanded by Brigadier MMS Bakshi, MVC.


नाथू ला दोनों देशों के बीच टकराव का बिंदु बन गया. 1967 के टकराव के दौरान भारत की 2 ग्रेनेडियर्स बटालियन के जिम्मे नाथु ला की सुरक्षा थी. इस बटालियन की कमान तब ल़े कर्नल (बाद में ब्रिगेडियर) राय सिंह के हाथों में थी. इस बटालियन की कमान तब ब्रिगेडियर एम़ एम़ एस़ बक्शी, एमवीसी, की कमान वाले माउंटेन बिग्रेड के अधीन थी ।


According to an Indian Army source, during the military patrols on Nathu La Pass, there was often an atmosphere of verbal warfare between the soldiers of the two countries, which soon turned into a rage. At that time, the only person who spoke a broken English on the Chinese side was his political kamisar (political representative), whose language was understood by the Indian soldiers.


भारतीय सेना के एक सूत्र के मुताबिक नाथु ला दर्रे पर सैन्य गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच अक्सर जुबानी जंग का माहौल बना रहता था जो शीघ्र ही धक्कामुक्की में तब्दील हो गया. तब चीन पक्ष में टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलने वाला एक मात्र शख्स उसका पॉलिटिकल कमीसार (राजनीतिक प्रतिनिधि) था, जिसकी भाषा भारतीय सैनिकों को समझ में आती थी ।



Taking cognizance of an incident at Dhakamukki on 6 September 1967, the Indian Army decided to lay a wire between the passes from Nathu La to Cebu La to relieve tension. This responsibility was assigned to a contingent of 70 Field Company of Engineers and 18 Rajputs. When the fencing began, China's political commissar asked Rai Singh to stop this work immediately. Troubles began on both sides and tensions with the Chinese officer increased. Chinese soldiers immediately returned to their bunkers and Indian engineers continued to wire .


6 सितंबर, 1967 को धक्कामुक्की की एक घटना का संज्ञान लेते हुए भारतीय सेना ने तनाव दूर करने के लिए नाथु ला से लेकर सेबू ला तक के दर्रे के बीच में तार बिछाने का फैसला किया. यह जिम्मा 70 फील्ड कंपनी ऑफ इंजीनियर्स एवं 18 राजपूत की एक टुकड़ी को सौंपा गया. जब बाड़बंदी शुरू हुई तो चीन के पॉलिटिकल कमीसार ने राय सिंह से फौरन यह काम रोकने को कहा. दोनों ओर से कहासुनी शुरू हुई और चीनी अधिकारी के साथ धक्कामुक्की से तनाव बढ़ गया. चीनी सैनिक तुरंत अपने बंकर में लौट गए और भारतीय इंजीनियरों ने तार डालना जारी रखा।


Within a few minutes, there was a loud noise from the Chinese border, and then the Chinese started firing from medium machine guns. Indian soldiers had to suffer heavy losses initially, because they did not anticipate such a move from China. Rai Singh himself was injured, while a small contingent of Indian soldiers led by two brave officers, Captain Dagar of 2 Grenadiers and Major Harbhajan Singh of 18 Rajput, tried their best to counter the Chinese soldiers and in this effort both the officers were martyred. went.


चंद मिनटों के अंदर चीनी सीमा से ह्न्सिल की तेज आवाज आने लगी और फिर चीनियों ने मेडियम मशीन गनों से गोलियां बरसानी शुरू कीं. भारतीय सैनिकों को शुरू में भारी नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि उन्हें चीन से ऐसे कदम का अंदेशा नहीं था. राय सिंह खुद जख्मी हो गए, वहीं दो जांबाज अधिकारियों 2 ग्रेनेडियर्स के कैप्टन डागर एवं 18 राजपूत के मेजर हरभजन सिंह के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों के एक छोटे दल ने चीनी सैनिकों का मुकाबला करने की भरपूर कोशिश की और इस प्रयास में दोनों अधिकारी शहीद हो गए ।




Within the first 10 minutes, about 70 soldiers were killed and many were injured. After this, the counter attack from India shattered the intention of China. Taking advantage of its strong strategic position from Cebu La and Camel's Back, India fiercely displayed artillery power. Many Chinese bunkers were demolished and according to Chinese estimates, more than 400 of their soldiers were killed at the hands of Indian soldiers.


प्रथम 10 मिनट के अंदर करीब 70 सैनिक मारे जा चुके थे और कई घायल हुए. इसके बाद भारत की ओर से जो जवाबी हमला हुआ उसने चीन का इरादा चकनाचूर कर दिया. सेबू ला एवं कैमल्स बैक से अपनी मजबूत रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए भारत ने जमकर आर्टिलरी पावर का प्रदर्शन किया. कई चीनी बंकर ध्वस्त हो गए और खुद चीनी आकलन के अनुसार भारतीय सैनिकों के हाथों उनके 400 से अधिक सैनिक मारे गए ।



Firing continued day and night by the Indian side for three consecutive days. China had been taught a lesson. On 14 September, the Chinese threatened to launch an airstrike if the firing did not stop from India. By then, China had received lessons and the firing stopped.


भारत की ओर से लगातार तीन दिनों तक दिन-रात फायरिंग जारी रही. चीन को सबक सिखाया जा चुका था. 14 सितंबर को चीनियों ने धमकी दी कि अगर भारत की ओर से फायरिंग बंद नहीं हुई तो वह हवाई हमला करेगा. तब तक चीन को सबक मिल चुका था और फायरिंग रुक गई।





In the night, Chinese soldiers carried the dead bodies of their slain companions and India was accused of violating the border. Take it on 15 September. J. Jagjit Arora and Lt. The bodies were exchanged in the presence of several senior officers, including Sam Manekshaw.


रात में चीनी सैनिक अपने मारे गए साथियों की लाशें उठाकर ले गए और भारत पर सीमा का उल्लंघन करने का आरोप गढ़ा गया. 15 सितंबर को ले. ज. जगजीत अरोरा एवं ले. ज. सैम मानेकशॉ समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शवों की अदला-बदली हुई।




On October 1, 1967, the People's Liberation Army of China dared to take the Patience Test of India again in the Chao La area, but there the Indian battalions named Mustaid 7/11 Gorkha Rifles and 10 Jack Rifles thwarted the audacity of China Taught the lesson again.


1 अक्टूबर, 1967 को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने चाओ ला इलाके में फिर से भारत के सब्र की परीक्षा लेने का दुस्साहस किया, पर वहां मुस्तैद 7/11 गोरखा राइफल्स एवं 10 जैक राइफल्स नामक भारतीय बटालियनों ने इस दुस्साहस को नाकाम कर चीन को फिर से सबक सिखाया.





Both these lessons prevent China from firing on the border till date. Since then, not a single bullet has been fired on the border, even though the army of the two countries is engaged in patrolling the border by putting eyes in each other's eyes. Today, there are reports of goodwill between the army of the two countries. Will China dare against India even after such lessons?


दोनों सबक चीन को आज तक सीमा पर गोली बरसाने से रोकते हैं. तब से आज तक एक भी गोली सीमा पर नहीं चली है, भले ही दोनों देशों की फौज एक-दूसरे की आंखों में आंखें डालकर सीमा का गश्त लगाने में लगी रहती है. आज दोनों देशों की फौज के बीच यदा-कदा सद्भाव प्रदर्शन की खबरें भी आती हैं. क्या ऐसे सबक के बाद भी चीन भारत के खिलाफ दुस्साहस करेगा?



Doklam Dispute





After the India-China war in 1967, the Doklam dispute between India and China started. It started on behalf of China, in fact the problem started on 18 June 2017 when about 270 to 300 Indian soldiers of bulldozers Along with crossing the India-China border, China stopped the road construction. India had said that this place was disputed between Bhutan and China and there could not be a road here. This led to a military standoff between the two countries.


History of Doklam


The Anglo Chinese Treaty, in 1890, led to trade relations between British Commissioner AW and Chinese Commissioner Ho Chang Jung and border demarcation of the Chumbi Valley, which China and Bhutan maintained through the Land Bill Agreement in 1988 and 1998, as the case may be. Had agreed to restore peace in the Doklam region. A treaty was signed between India and Bhutan in 1949 and under this treaty there was agreement between the two countries that any defense affairs policy of Bhutan would be implemented with the opinion or advice of India, but then in 2007. According to the second treaty between India and Bhutan, Bhutan is no longer obliged to take instructions from India in its defense case, it can take its decision freely in this matter.


एंग्लो चीनी संधि, सन 1890 में ब्रिटिश आयुक्त ए डब्ल्यू और चीनी आयुक्त हो चांग जंग के बीच व्यापारिक संबंधो और चुम्बी घाटी की सीमा हदबंदी को लेकर हुई थी, जिसको चीन और भूटान ने 1988 और 1998 में हुए भूमि बिल समझौते के माध्यम से यथास्थिति रखते हुए डोकलाम क्षेत्र में शांति बहाली पर अपनी सहमती जतायी थी. सन 1949 में भारत और भूटान के बीच एक संधि हुई थी और इस संधि के तहत दोनों देशों के बीच ऐसी सहमती बनी थी कि भूटान की किसी भी रक्षा मामलों की नीति भारत की राय या सलाह से लागू की जाएगी, लेकिन फिर उसके बाद 2007 में भारत और भूटान के बीच हुई दूसरी संधि के अनुसार भूटान अब भारत से अपने रक्षा मामले में निर्देश लेने के लिए बाध्य नहीं है, वह इस मामलें में स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय ले सकता है.


Doklam was historically part of the Yatung market in Tibet, a disputed region claimed by Bhutan and China. Doklam lies in Tibet, part of the Chumbi Valley, Doklam is located 15 km southeast of the Nathula Pass in Indian territory. It separates India and China by 30 kilometers. However, China says that the name Doklam was used in the pastures of Tibet. Before 1960, Bhutan shepherds used to visit this area only with permission from them, but no historical evidence of this claim of China has been found.


ऐतिहासिक रूप में डोकलाम तिब्बत के यातुंग बाजार का हिस्सा था, यह भूटान और चीन के द्वारा दावा किया जाने वाला एक विवादित क्षेत्र है. डोकलाम चुम्बी घाटी का हिस्सा तिब्बत में निहित है, डोकलाम भारतीय क्षेत्र के नाथुला दर्रे से 15 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पूर्व में अव्यवस्थित है । यह भारत और चीन को 30 किलोमीटर तक अलग करता है. हालाँकि चीन का कहना है कि डोकलाम नाम का उपयोग तिब्बत के चारागाह करते थे. सन 1960 से पहले तक भूटान के चरवाहे उनसे अनुमति लेकर ही इस क्षेत्र में जाते थे, लेकिन चीन के इस दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला है।

Why is China disputing India on the India-China border so aggressively?

China today is very much opposed to the covid-19 virus, in the early times China hide the case of covid-19 virus from the whole world. Due to this act of China, other countries are uniting against China. The US has directly blamed China for the covid-19 virus. China is disputing the India-China border with India to divert the attention of the world from covid-19 virus.


चीन का आज के समय मे covid -19 virus को लेकर बहुत ज्यादा विरोध हो रहा है , शुरुआती समय मे चीन ने covid - 19 वायरस का मामला पूरी दुनिया से छुपाया । चीन की इस हरकत से दूसरे देश चीन के खिलाफ एकजुट हो रहे है। अमेरिका ने covid -19 virus को लेकर सीधे चीन को जिम्मेदार ठहराया है। चीन ने दुनिया का ध्यान covid - 19 virus से हटाने के लिये भारत से India - China border पर विवाद कर रहा है ।



On the other hand, the construction of infrastructures on the border of Ladakh and Arunchal region bordering China has started rapidly. China is not liking India to develop infrastructures on the border so fast, China is opposing it from the beginning. China and India have a border of 3500 km, it is being said from the Indian defense news that India is improving the infrastructure on the border LAC with China, given the aggressive policy of China, depending on Hearing that China has been troubled, China would never want India to strengthen its infrastructure LAC, it knows that if India develops on the border, the Indian Army's capacity will be greatly increased.


दूसरी तरफ भारत की चीन से लगती लद्दाख़ और Arunchal प्रदेश की सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम तेजी से सुरु कर दिया है। भारत का इतना तेज़ी से बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का develop करना चीन को बिल्कुल पसंद नही आ रहा है , चीन इसका सुरु से ही विरोध कर रहा है । चीन और भारत की सीमा 3500 km की है , indian defence news के हवाले से ये बात कही जा रही है , की चीन की आक्रामक नीति को देखते हुए भारत अपनी चीन से लगते हुए सीमा LAC पर इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बना रहा है , ये खभर सुनकर चीन परेशान हो गया है , चीन ये कभी ये नही चाहेगा की भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर LAC पर मजबूत करे , वो जानता है कि भारत सीमा पर अगर डेवलपमेंट कर लिया तो इंडियन आर्मी की कैपेबिलिटी मे बहुत इजाफा हो जाएगा


The current government of India is rapidly building infrastructure and new roads along India's border with China. Previous year 2014 the cetral Government of India was very slow to build roads alo ng the Indo-China border and it was not possible to carry heavy vehicles like military tanks and artillery on the roads that were built. Earlier governments did not pay much attention to develop the best infrastructure along the border of India with China. Because of which China never felt any problem. But after the new government came after 2014, the situation changed a lot, the current government developed new quality roads and infrastructure rapidly. BRO oversees the construction of the road along the India-China border. India is rapidly building a new road on eastern Ladakh, these strong roads are built, the Indian Army can easily limit its patrolling and watch China's movement, this is not tolerated by China. China does not want these roads to be built. The road that India is building on LAC today, China had built that road in the 1950s itself. You can understand this thing that the work that India is doing today, China had done that work 70 years ago. As India will improve the infrastructure on LAC, so will China oppose it, in the coming time also China will dispute with India on this matter.


भारत की मौजूदा सरकार भारत की चीन से लगती हुई सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर और नई सड़को का निर्माण तेजी से कर रहा है । साल 2014 से पहले भारत की उस समय की केंद्र सरकार की भारत - चीन सीमा पर सड़को का निर्माण करने की गति बहुत धीमी थी और जो सड़के बनाई भी गयी थी उस पर मिलिट्री के टैंक और अर्टिलिरी जैसे भारी वाहनों को ले जाना पॉसिबल नही था । पहले की सरकारों ने चीन से लगती हुई भारत की सीमा पर बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर को develop करने पर ज्यादा ध्यान नही दिया । जिसके कारण चीन को कभी कोई दिक्कत महसूस नही हुई। लेकिन 2014 के बाद नई सरकार आने से हालात काफी बदल गये , तात्कालिक सरकार ने नयी ओर अच्छे क्वालिटी की रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास किया। भारत चीन सीमा पर रोड बनाने का काम BRO देखता है। भारत पूर्वी लद्दाख पर तेज़ी से नई सड़क को बना रहा है , ये मजबूत सड़को के बन जाने से भारतीय सेना आसानी से पेट्रोलिंग अपनी सीमा कर सकती है और चीन की movement को watch कर सकती है , ये बात चीन को बर्दाश्त नही हो रहा है। चीन ईन सड़को को नही बनने देना चाहता है । भारत जो सड़क आज LAC पर बना रहा है ,चीन 1950 के समय मे ही वो रोड बना लिया था। आप इस बात को ऐसे समज सकते है जो काम भारत आज कर रहा है , वो काम चीन 70 साल पहले ही कर लिया था। जैसे - जैसे LAC पर भारत इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाता जायेगा वैसे - वैसे चीन इसका विरोध करेगा , आने वाले समय मे भी चीन इसी बात को लेकर भारत से विवाद करता रहेगा।



After the Lok Sabha elections in 2014, the new government of India was elected by the people, in which the decisions were taken. In it, an important decision was taken regarding BRO (Border Road Oraganization). In this decision, permission was to be given to those roads made by BRO, which were to be built in an area of ​​100 km of LAC. The defense experts, quoting the INDIAN Defense news, also say that with the construction of this road, India's position will be very strong on the LAC strategically. In the year 2017, the central government made BRO more powerful, many new rights were given to BRO's DG GENERAL, under the new rules, the DG general of BRO had the financial right to spend up to 100 crores.


2014 मे लोकसभा चुनाव के बाद भारत की नई सरकार जनता द्वारा चुनकर आई , उसमे जो सुरु मे फैसले किये थे उसमे एक महत्वपूर्ण फैसले BRO (Border Road Oragnization) को लेकर हुआ था। इस फैसले मे BRO द्वारा बनाये जाने वाली उन सड़को को परमिशन देना था , जो LAC के 100 किलोमीटर के area मे बनाये जाने वाली थी। INDIAN Defence news के हवाले से जो रक्षा विशेषयज्ञ है , उनका भी ये कहना है ये रोड के बन जाने से स्ट्रैटिजिक रूप से भारत की स्थिति LAC पर बहुत मजबूत हो जाएगी। year 2017 को केंद्र सरकार ने BRO को ओर शाक्तिशाली बना दिया , BRO के DG GENERAL को कई तरह के नये अधिकार दिये गये , ईन नये नियमो के तहत BRO के DG general को 100 करोड़ रुपया तक खर्च करने का वित्तिय अधिकार दिया गया है।


At this time, if there is a war between India and China, then which country will dominate over which country?





whole world familiar with the expansionist policies of the Chinese Army PLA. The PLA has direct control with the President of China. China shows the strength of its army in front of the whole world under propaganda strategy, which makes China's army strength even bigger. China is the highest spending country after America on its militry power, China military power comes in number 2 in terms of military strength, there is another aspect of PLA, China also has many wrong information about its army. It spreads. The Indian Army has 14,00,000 soldiers, the Chinese Army has 10, 00,000 soldiers, since the year 2015, China is reducing the number of its soldiers. According to a report, China now has less than 10, 00,000 soldiers left. One major weakness of China is that there is a Child Policy in place from 1979 to 2015. Which means that most of the soldiers of China are the only children of their parents, it is also possible that during the war, the soldiers of China should think about their family before the country. These soldiers are the only child of their family, they are taken care of with love, they are not able to live difficult Life etc. Therefore, when they come in the army, they prove to be weak. Chinese army's second weakness is the lack of war experience in it, the war that China fought 41 years ago in 1979 from a small country like Vietnam, which also lost the Chinese army. After losing the Vietnam War, China has neither fought any war, nor won any war. It shows one thing that the Chinese army, which is still a soldier, has no experience of winning any war. India had won the Kargil war 21 years ago, the Indian Army has experience of surgical strike and airstrike in the enemy's country. In India, the Indian Army keeps fighting on many front lines, 365 days of the year the Indian Army fights a foreign terrorist, and kills those terrorists. This shows you, the Indian Army has more war experience than the China Army. China keeps threatening countries to war from time to time, similarly it threatens India to go to war, but China has said in a report that 20% of China soldiers are not fit, according to China's report 25 % Soldiers take drugs If China fights India, then he knows that he may be lacking in soldiers, for that he is working on a backup plan. Under this, all the citizens of China are required to give military service for 2 years. If India-China have a conventional war, then India will be stronger than China.




इस समय india china के बीच war हो गया तो कौन देश किस देश पर भारी पड़ेगा?


चीन की सेना PLA की विस्तारवादी नीतियों से पूरी दुनिया परिचित है । PLA का सीधा कंट्रोल चीन के राष्ट्रपति के पास मे होता है। चीन अपनी सेना की ताकत प्रोपेगैंडा स्ट्रेटेजी के तहत पूरी दुनिया के सामने दिखाता है , जिससे चीन की आर्मी ताकत और बड़ी लगने लगे। चीन अपनी militry power पर अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश है , सेना की ताकत के मामले मे चीन मिलिट्री पावर 2 नंबर पर आता है , PLA का एक दूसरा पहलू भी है , चीन अपनी सेना को लेकर कई तरह की गलत जानकारी भी फैलाता है। भारत की सेना मे 14,00,000 सैनिक है ,चीन की आर्मी मे 10, 00,000 सैनिक है , year 2015 से चीन अपने सैनिको की संख्या कम कर रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन मे अब 10, 00,000 से भी कम सैनिक बचे है। चीन की एक बड़ी कमजोरी ये है कि वहाँ पर year 1979 से लेकर year 2015 तक one Child Policy लागू है। जिसका मतलब चीन के ज्यादातर सैनिक अपनी माता - पिता के एकलौती संतान है , ये बात भी मुमकिन है ,की युद्ध के समय चीन के सैनिक देश से पहले अपने परिवार के बारे मे सोचे। ये सैनिक अपने परिवार के इकलौते संतान होने की वजह से इनकी देखभाल प्यार से होती है, ये मुश्किल जीवन जीने के आदि नही होते है । इसलिए जब सेना मे आते है तो कमजोर साबित होते है। चीन की सेना दूसरी कमजोरी उसमे युद्ध के अनुभव की कमी है , जो युद्ध चीन ने 41 वर्ष पहले 1979 मे विएतनाम जैसे छोटे से देश से लड़ा था वो युद्ध भी चीन की सेना हार गई थी। वियतनाम युद्ध हारने के बाद चीन ने ना तो कोई युद्ध लड़ा है , और ना कोई युद्ध जीता है। इससे एक ये बात पता चलता है कि चीन की सेना जो अभी सैनिक है उनके पास कोई युद्ध जीतने का अनुभव नही है। भारत ने 21 वर्ष पहले कारगिल युद्ध जिता था , भारतीय सेना को दुश्मन के देश मे जाकर सर्जिकल स्ट्राइक ओर airstrike का अनुभव है। भारत मे भारतीय सेना कई तरह के front पर लड़ती रहती है , साल के 365 दिन भारतीय सेना विदेशी आतंकवादी से लड़ती है ,ओर उन आंतकवादी को मारती है। इससे आपको ये पता चलता है , भारतीय सेना चीन सेना के compare मे युद्ध का ज्यादा अनुभव है। चीन समय - समय पर कई देशो को युद्ध की धमकी देता रहता है , इसी तरह वो भारत को युद्ध करने की धमकी देता है , लेकिन चीन ने एक रिपोर्ट मे कहा है 20 % चीन सैनिक फिट नही है , चीन के रिपोर्ट के हिसाब से 25 % सैनिक नशा करते है। चीन अगर भारत से युद्ध करता है तो वो जानता है कि उसको सैनिको की कमी हो सकती है ,उसके लिए वो एक backup plan पर काम कर रहा है। इसके तहत चीन के सभी नागरिकों को 2 वर्ष के लिये सैन्य सेवा देना जरूरी है। भारत - चीन मे कन्वेंशनल वॉर हो जाये तो इसमे भारत चीन के मुकाबले ज्यादा मजबूत रहेगा।


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